जहाँ श्वेत संगमरमर राधा–कृष्ण की अमर लीलाओं की कथा सुनाता है
Where white marble whispers the eternal pastimes of Radha Krishna
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
5TH ORIGINAL JAGADGURU
सनातन धर्म के इतिहास में पाँचवें मूल जगद्गुरु के रूप में मान्यता प्राप्त, श्री कृपालु जी महाराज ने अपना सम्पूर्ण जीवन शुद्ध भक्ति — राधा-कृष्ण के प्रति निःस्वार्थ, अनन्य प्रेम — के दर्शन को समर्पित किया। प्रेम मंदिर उनकी संसार को दी गई अनुपम भेंट है।
Recognised as the 5th original Jagadguru, he dedicated his life to pure Bhakti. Prem Mandir is his eternal gift to devotees worldwide.
यह मंदिर जगद्गुरु कृपालु परिषत् (JKP) द्वारा प्रबंधित है, जो उनके दिव्य प्रेम के सन्देश को संसार भर में फैला रही है।
राधे राधे! राधा और कृष्ण से प्रेम ही मानव जीवन का परम लक्ष्य है — इस संसार और परलोक में दिव्य आनन्द की प्राप्ति का एकमात्र मार्ग।
Love for Radha and Krishna is the supreme goal of human life — the only path to attain divine bliss in this world and beyond.
— जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · प्रेम रस मधिराअपने दर्शन की योजना हमारे लाइव शेड्यूल के साथ बनाएँ। मंदिर प्रतिदिन दो सत्रों में खुलता है।
सभी दर्शनार्थियों के लिए प्रवेश नि:शुल्क है · Entry is completely free for all
यह मंदिर पूर्णतः शुद्ध इतालवी काररारा संगमरमर से निर्मित है। नींव १४ जनवरी २००१ को रखी गई और ११ वर्षों की साधना के बाद १७ फरवरी २०१२ को इसका प्रतिष्ठा महोत्सव सम्पन्न हुआ।
इटली से मँगाए गए ३०,००० टन काररारा संगमरमर को १,००० से अधिक कुशल शिल्पकारों ने पारम्परिक और आधुनिक दोनों विधियों से तराशा।
मंदिर के बाहरी भाग पर ८४ भव्य पैनलों में श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाएँ उकेरी गई हैं — गोवर्धन लीला, रास लीला, और कालिया नाग लीला।
७३,००० वर्ग फुट का विशाल स्तम्भ-रहित सत्संग हॉल — भारत के सबसे बड़े हॉलों में से एक — भक्तों के लिए एक अद्वितीय अनुभव प्रदान करता है।
भू-तल श्री राधा-कृष्ण को समर्पित है। प्रत्येक दीवार और स्तम्भ पर उनकी दिव्य प्रेम-कथा की झाँकियाँ अंकित हैं।
ऊपरी तल श्री सीता राम को समर्पित है। कोमल संगमरमर की नक्काशियों में प्रभु राम और माता सीता की महागाथा अंकित है।
प्रत्येक संध्या हजारों LED दीपों की रोशनी में श्वेत संगमरमर रंग-बिरंगे प्रकाश में नहा उठता है — एक ऐसा दृश्य जिसे "धरती पर स्वर्ग" कहा जाता है।
बाग और बाहरी क्षेत्र में फोटोग्राफी की अनुमति है · मुख्य गर्भगृह में सख्त मनाही है
दर्शनार्थियों द्वारा सर्वाधिक पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर यहाँ दिए गए हैं।
प्रेम मंदिर पर्वों के अवसर पर अपूर्व भव्यता के साथ जीवन्त हो उठता है। लाखों भक्त यहाँ संगीत, नृत्य और आध्यात्मिक प्रवचन के दिव्य उत्सव में भाग लेने आते हैं।
श्री कृष्ण के जन्मोत्सव पर मध्यरात्रि के दर्शन, भव्य सजावट और रात भर भजन-कीर्तन होता है। पूरा मंदिर अलौकिक प्रकाश में नहा उठता है।
राधा रानी के प्रकटोत्सव पर मंदिर फूलों के सागर में बदल जाता है। विशेष आरती, सांस्कृतिक कार्यक्रम और मनमोहक फूलों की होली मनाई जाती है।
वृन्दावन की होली विश्वविख्यात है और प्रेम मंदिर में इसका आयोजन अत्यन्त भव्य रूप से होता है — फूलों की होली और रंगों का उत्सव देश-विदेश से भक्तों को आकर्षित करता है।
प्रेम मंदिर वृन्दावन के रमण रेती क्षेत्र में स्थित है और प्रमुख शहरों से सुलभता से पहुँचा जा सकता है।
Raman Reti, Vrindavan, Mathura, UP – 281121
मात्र १२ किमी दूर · ऑटो-रिक्शा और टैक्सी आसानी से उपलब्ध हैं · लगभग २५–३५ मिनट का सफर।
यमुना एक्सप्रेसवे (NH 19) द्वारा १५० किमी · लगभग २–२.५ घण्टे · दिल्ली से एक दिन की यात्रा के लिए आदर्श।
लगभग ६० किमी दूर · कैब और शेयर टैक्सी उपलब्ध · ताजमहल दर्शन के साथ प्रेम मंदिर भी करें।